कितनी है मेरी जिंदगी कितने है मेरे अरमान.
सब कुछ खो गया मैं फिर भी मैं रहा अनजान.
खामोशी इतनी थी जिंदगी मैं की कुछ आहट न हुई.
जब आंख खोली तो अहसाश हुआ,कुछ हुआ.
खामोशी थी इतनी गहरी,की अहसाश को भी दबा दिया.
जिंदगी जीनी थी मुझको ये भी भुला दिया.
सब कुछ खो गया मैं फिर भी मैं रहा अनजान.
खामोशी इतनी थी जिंदगी मैं की कुछ आहट न हुई.
जब आंख खोली तो अहसाश हुआ,कुछ हुआ.
खामोशी थी इतनी गहरी,की अहसाश को भी दबा दिया.
जिंदगी जीनी थी मुझको ये भी भुला दिया.
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