Thursday, October 16, 2008

ऐ मेरी झूठी मुहब्बत,मैं तुझे झूठा प्यार करू


ऐ मेरी झूठी मुहब्बत,मैं तुझे झूठा प्यार करू.
तेरे लिए मैं झूठ का ताजमहल खडा करू.

उस महल में मैं तुझे चुनवा दू,कुछ सोच के रह जाता हूँ.
रात को कही तू आ न जाये ये सोच कर दर जाता हूँ.

तेरी खूबसूरती को सूरज की आग लगे.
ये मेरी झूठी मुहब्बत तुझे मेरी बात लगे.

शर्मो-हया की देवी कभी तो शर्माजा.
५ बछो की अम्मा हो गई अब तो अकाल(BUDHI) आ जा.

झूठी खूबसूरती के लिबाज़ ,मैं तू शैतान लगती है.
रात मैं खून पीने वालो मच्छरों को तू संतान लगती है.

खून मैं तेरे पानी मिल जाये तेरे लम्बे दातो मैं सडन पड़ जाये.
जिन्हें देख कर तेरा कलेजा ठंडा होता था.
उनको तेरी बुरी नज़र लग जाये.


रात को जब तू निकलती अहि लोगो की सांसे रुक जाती है.
जिस गली से तू निकल जाये वहा,के कुत्ते मर जाये.


तेरे दर से अब लोगो ने घर से निकलना छोड़ दिया.
घर मैं ही उन्हों ने तेरा सैतानी चेहरा लगा लिया. 
घर मैं ही उन्हों ने तेरा शैतानी चेहरा लगा लिया.

माँ का दर्जा क्यों पाया?

माँ का दर्जा क्यों पाया?

जिस स्त्री ने दूध पिलाया,उसने हे माँ का दर्जा क्यों पाया.
जिस लड़की ने बंधी राखी,उसने हे बहन का दर्जा क्यों पाया.
लगता है हमारा समाज सो गया है तभी रिस्तो मैं इतना वेध आ गया है.
तभी रिस्तो मैं इतना वेध आ गया है.

संबंधो का यह लोप नहीं तो और क्या है?
मन की यह सोच नहीं तो और क्या है?
मन की बिषय पीडा साफ झलक आती है.
जब रह चलती लड़की बाज़ार मैं लुट जाती है
.
जब रह चलती लड़की बाज़ार मैं लुट जाती है.

पत्नी के आते ही गहर स्वर्ग बन जाता है.

पत्नी के आते ही गहर स्वर्ग बन जाता है.

पत्नी के आते ही गहर स्वर्ग बन जाता है.
देवी मूरत की जगह पत्नी का चेहरा नज़र अत्ता है.

.......................................................
मेरी पत्नी के आत्ते मैं भी बदल गया.
अब मुझे कुछ समझ मैं नहीं अत्ता है.
पत्नी किस-किस से बाते करती है.
यही सोचते सोचते समय निकल जाता है.

अब तो पत्नी जी का जंजाल बन गई .
घर में ही मेरे ससुराल बन गई.
घर में ही मेरे ससुराल बन गई.


अब सास-ससुर सब यही पाए जाते है.
मोहल्ले वाले मुझे ताने सुनाये जाते है.

आपने ही घर में हो गया हूँ मैं बंदी.
ऐसा लगता है जैसे हो गई मेरी नशबंदी.

सारा दिन मुझ पर हुक्म चलाया जाता है.
बात बात पर मेरा मज्ज़क उड़ाया जाता है.

महीनो बीत जाते है पत्नी से नहीं मिल पता हूँ.
सास-ससुर के अंगे मैं बेबश नज़र आता हू.
सास-ससुर के अंगे मैं बेबश नज़र आता हू.

मेरी दशा अब किसी से छुपी नहीं है.
मेरे ही घर मैं मेरे लिए जगह नहीं है.

मोहल्ले वाले भी अब मुझ पर तरश खाते है.
भाई राम तुम्हारे अछे दिन आने वाले है.
सुबह-शाम यही सुनते है.
सुबह-शाम यही सुनते है.

नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला

नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला.

नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला.
नारी से समाज चला नारी से ही हमको सम्मान मिला.
नारी मातृत्व का वोध कराती है,जननी ये सुख लती है.

झमा त्याग की ये देवी,कलयुग मैं कामनी नज़र आती है.
कम पीडा से ग्रसित मनुष्य को अति मन भाती है.
बाजारों मैं ये बेचीं जाती है.

करुना मय इनका स्वरुप .अरुणामय इनका स्वरुप,.......
बाजारों मैं लुटता है,इंसान आपने ही मूल्यों पर गीरता है.
नारी की इस व्यथा को व्यवस्था बना दिया गया.
आपनी सुख पूर्ति के लिए इनको समाज मैं गीरा दिया गया.


मान सम्मान सब खो गया,इनका जीवन अन्धकार मैं खो गया.
अगर हमने आपनी इस अवस्था को नहीं बदला,तो समाज खत्म हो जायेगा.
फिर से नारी का सम्मान लौट के नहीं आयेगा.