एँ महलो में रहने वालो अमीरों,
गरीबो पे हँसना छोड़ दो.
कुछ पल के लिए ही सही,
गरीबो से दिल का नाता छोड़ लो.
एँ महलो में रहने वालो अमीरों,
गरीबो पे हँसना छोड़ दो.२-२-.
भले ही घर हमारे न हो महलो जैसे,
दिल में हमारे दरिया दिली पाई जाती है.
आपनो से आपना पन,गैरो को भी अपनाते है.
सुखी रोटी ही सही उसको भी बाँट कर खाते है.
हमारे घरो की दीवाले,महलो से कमजोर सही.
हमें रात में नीद आ जाती है.
क्युकी हमारे घर में ना तिजोरी,
और नी तिजोरी में रक्खी जाने वाली, लक्ष्मी पाई जाती है.
हम हारते नहीं है हिम्मत ,उम्मीद पर जीते है
आज नहीं तो कल वो पल आयेगा,
जब अमीरों को समझ में आयेगा
भगवान मंदिर में नहीं गरीबो में बस्ता है.
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