Sunday, June 28, 2009

Man Ki Udaan


मन बहुत ही चलाये मान होता है इसकी गति लाखो सूर्य किरणों से भी अधिक होती है,यह एक पल में आपना इस्थान बदल कर कही और vichran करने लगता है.जिस भी मनुष्य का मन उसके काबू में है वही इस संसार में महान पुरुष है...

कुछ पंक्ति मेरी लिखी हुई.......


मन मेरा मोहि सताबे
एक पल भी ठहर न पाबे

जो में भजन करू,तन छोड़ मन कही और फिरे |
भगवत भजन में मन कह रश पाबे||
मन मेरा मोहि सताबे

तृष्णा-बंधन खूब सतावे
मन मोर कही चैन न पावे.

माया ग्रसित संसार में यह मन रश पावे |
मेरा मन मोरे पास न अवे-मेरा मन मोरे पास न अवे ||

माँ आज आगन सुना है


माँ आज आगन सुना है

माँ आज आगन सुना है
चहल-पहल के बिना अधुरा है
कल तक यहाँ सब थे,आज क्या हुआ
माँ बोल न ये आगन कैसे सुना हुआ

परिवारों का सिकुड़ता दायरा आज यही पूछ रहा है |
घरो का टूटना आज कल क्यों हो रहा है ||

माँ बोलना कल तक चाचा चची ,दादा दादी सब यही थे |
फिर आज क्या हुआ,सब का आगन अलग कैसे हुआ ||

माँ अब मैं किसके संग खेलुगी,कौन कहानिया सुनाये गा |
मैं तो अभी बच्ची हूँ,कैसे अलग रही पाउगी ||

याद है माँ ये आगन या याद दिलाऊ |
माँ बोल न मैं तुझे कैसे समझाऊ ||

जब तुम और पापा काम पर चले जाते हो |
मैं अकेली यादो में खो जाती हूँ ||

माँ तुम मुझ से सब ले लो .......
बदले में मेरी ख़ुशी मेरा प्यारा आगन दे दो.

मत मरो मुझे इस तरह


मत मरो मुझे इस तरह
आखिर मेरा कसूर क्या है

रुको रुको मत मरो मुझे
मुझे भी दुनिया में आना है आप सब का प्यार पाना है

मैं लड़का नहीं तो क्या हुआ
मैं हे तो वंश बढाउगी
बिन मेरे कुछ न कर पाएगी दुनिया
एक दिन खुद ही मिट जाये गी

जब मैं आउगी खुशिया हजारो लाउगी
घर तेरे दीप जलेगा,मैं कही और उज्जला फैलाउगी

रुको रुको मत मरो मुझे...क्यों दे रहे हो ये सजा.
क्या तुमको मेरी पीडा समझ नहीं आती है

तू तो खुद एक माँ है, तू तो समझ मेरी पीडा
मैं तेरी बिटिया हूँ,तू भी माँ बन जा.