टुकड़े टुकड़े जोड़ कर ख़ुद को देखने का आईना बनया.
दुनिया की भीड़ मैं अकेला न हो जाऊ,ख़ुद के लिए दोस्त बनाया.
इसे चाहे कहना मेरा पागलपन पर ये हकीकत है.
इस भीड़ मैं ख़ुद को पहचाने का ये तरीका है.
यहाँ चेहरे लगा के सब घुमते है,छुपा के आपनी हकीकत.
सभ्यता इनकी ओट होती है,मन में इनके खोट होती है.
ख़ुद की परझाई को मैंने आइने मैं कैद कर लिया.
अनजान दुनिया में ख़ुद के लिए दोस्त बना लिया .
