Wednesday, January 28, 2009

देख मेरे हिंद को क्या हुआ,ये इतना कैसे लाचार हुआ.|
बार बार अत्तंक से क्या इसको घाव न हुआ,समझो इसकी पीड़ा.||
ये मूक है कुछ नही बोल पाएगा,हिंद अब आपनी व्यथा नही सुना पाए गा.|||

जाती धर्म सम्प्रदाय भारत के ये भी है लाचारी.|
आतंकवाद सिरहाने बैठा जाने अब किसकी बारी.||

सभ्यता की जहा खोज हुई,आज वही सभ्यता को भूल रहा.|
पछिम की चमक से देखो कही हिंद खो रहा.

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