नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला.
नारी समाज की आधारशिला नारी नहीं पाषणशिला.
नारी से समाज चला नारी से ही हमको सम्मान मिला.
नारी मातृत्व का वोध कराती है,जननी ये सुख लती है.
झमा त्याग की ये देवी,कलयुग मैं कामनी नज़र आती है.
कम पीडा से ग्रसित मनुष्य को अति मन भाती है.
बाजारों मैं ये बेचीं जाती है.
करुना मय इनका स्वरुप .अरुणामय इनका स्वरुप,.......
बाजारों मैं लुटता है,इंसान आपने ही मूल्यों पर गीरता है.
नारी की इस व्यथा को व्यवस्था बना दिया गया.
आपनी सुख पूर्ति के लिए इनको समाज मैं गीरा दिया गया.
मान सम्मान सब खो गया,इनका जीवन अन्धकार मैं खो गया.
अगर हमने आपनी इस अवस्था को नहीं बदला,तो समाज खत्म हो जायेगा.
फिर से नारी का सम्मान लौट के नहीं आयेगा.
नारी से समाज चला नारी से ही हमको सम्मान मिला.
नारी मातृत्व का वोध कराती है,जननी ये सुख लती है.
झमा त्याग की ये देवी,कलयुग मैं कामनी नज़र आती है.
कम पीडा से ग्रसित मनुष्य को अति मन भाती है.
बाजारों मैं ये बेचीं जाती है.
करुना मय इनका स्वरुप .अरुणामय इनका स्वरुप,.......
बाजारों मैं लुटता है,इंसान आपने ही मूल्यों पर गीरता है.
नारी की इस व्यथा को व्यवस्था बना दिया गया.
आपनी सुख पूर्ति के लिए इनको समाज मैं गीरा दिया गया.
मान सम्मान सब खो गया,इनका जीवन अन्धकार मैं खो गया.
अगर हमने आपनी इस अवस्था को नहीं बदला,तो समाज खत्म हो जायेगा.
फिर से नारी का सम्मान लौट के नहीं आयेगा.
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