Thursday, October 16, 2008

ऐ मेरी झूठी मुहब्बत,मैं तुझे झूठा प्यार करू


ऐ मेरी झूठी मुहब्बत,मैं तुझे झूठा प्यार करू.
तेरे लिए मैं झूठ का ताजमहल खडा करू.

उस महल में मैं तुझे चुनवा दू,कुछ सोच के रह जाता हूँ.
रात को कही तू आ न जाये ये सोच कर दर जाता हूँ.

तेरी खूबसूरती को सूरज की आग लगे.
ये मेरी झूठी मुहब्बत तुझे मेरी बात लगे.

शर्मो-हया की देवी कभी तो शर्माजा.
५ बछो की अम्मा हो गई अब तो अकाल(BUDHI) आ जा.

झूठी खूबसूरती के लिबाज़ ,मैं तू शैतान लगती है.
रात मैं खून पीने वालो मच्छरों को तू संतान लगती है.

खून मैं तेरे पानी मिल जाये तेरे लम्बे दातो मैं सडन पड़ जाये.
जिन्हें देख कर तेरा कलेजा ठंडा होता था.
उनको तेरी बुरी नज़र लग जाये.


रात को जब तू निकलती अहि लोगो की सांसे रुक जाती है.
जिस गली से तू निकल जाये वहा,के कुत्ते मर जाये.


तेरे दर से अब लोगो ने घर से निकलना छोड़ दिया.
घर मैं ही उन्हों ने तेरा सैतानी चेहरा लगा लिया. 
घर मैं ही उन्हों ने तेरा शैतानी चेहरा लगा लिया.

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