हालत ख़राब है इस मुल्क के,
और रोज एक नये दल बन रहे है.
व्यवस्था बदलने की जब बात आती है,
तो समझोतों पे समझोते हो रहे है.
क्या चुनाव जीतने से
राजनितिक दल बनाने से, सब हल हो जायेगा.
तुम कोई खुदा नहीं जो सब,कुछ बदल जायेगा.
दुर्भाग्य है मेरे भारत का की
आन्दोलनों का दौर भी सिमट गया.
अपने लाभ और आकांक्षाओ के लिए,
वो भी एक दल बना गए.
हो रहा है भारत बदलाब
मिट रहा है भ्रष्टाचार
इसी हवा में वो
कुर्सी का मज़ा ले गए.
धधकते मुद्दों को,
बस एक जिनगरी दे गए.
रोता बिलाकता बेसहारा
हमें छोड़ गए उसी राह छोड़ गए.
चंद्रमणि मिश्रा
और रोज एक नये दल बन रहे है.
व्यवस्था बदलने की जब बात आती है,
तो समझोतों पे समझोते हो रहे है.
क्या चुनाव जीतने से
राजनितिक दल बनाने से, सब हल हो जायेगा.
तुम कोई खुदा नहीं जो सब,कुछ बदल जायेगा.
दुर्भाग्य है मेरे भारत का की
आन्दोलनों का दौर भी सिमट गया.
अपने लाभ और आकांक्षाओ के लिए,
वो भी एक दल बना गए.
हो रहा है भारत बदलाब
मिट रहा है भ्रष्टाचार
इसी हवा में वो
कुर्सी का मज़ा ले गए.
धधकते मुद्दों को,
बस एक जिनगरी दे गए.
रोता बिलाकता बेसहारा
हमें छोड़ गए उसी राह छोड़ गए.
चंद्रमणि मिश्रा