किसी की एक मुस्कराहट पर हम मर बैठे।
किसी अनजाने को दिल दे बैठ,
प्यार के समुंदर में खुद को डूबा बैठे.|
कुछ पल की थी मुलाकात
हम अपने जज्बात लूटा बैठे.
तोफा खुदा का समझ उसको.
दिल के मन मंदिर में बिठा बैठे.||
हम अपने जज्बात लूटा बैठे.
तोफा खुदा का समझ उसको.
दिल के मन मंदिर में बिठा बैठे.||
उसके भोलेपन उसकी मासूमियत पे मर बैठे.
एक दिल ही था अपना उसको लूटा बैठ|||
एक दिल ही था अपना उसको लूटा बैठ|||
कल तक उसको ख्यालो में जिया करते थे।
आज उसको अपना बना बैठे.
अब चुप हम है अब चुप हो है।
एक आग हम सीने में हम जला बैठे।।||
आज उसको अपना बना बैठे.
अब चुप हम है अब चुप हो है।
एक आग हम सीने में हम जला बैठे।।||
जाने कब मुलकात हो उससे,
यादो में उसके खुद को भूला बैठे.||
यादो में उसके खुद को भूला बैठे.||
copyright@चंद्रमणि मिश्रा