Saturday, April 12, 2014

आओ मिल कर हम अपनी मौत का जश्न मनाये.

आओ मिल कर हम अपनी मौत का जश्न  मनाये.
कुछ तुम मुस्कुराओ कुछ हम मुस्कुराये.

अब नहीं रहा कोई बंधन
न कोई रिश्ता बांध बायेगा.
हम मिल चुके है मिट्टी में,
अब हमें कोई गम नहीं सतायेगा.

न तू अब किसी के प्रति जवाबदेह,
न मैं किसी के प्रति जवाबदेह.
अब नहीं रहा कोई शरीर का बंधन,
तू भी मुक्त मैं भी मुक्त.

मौत नई है जश्न भी होगा,
अब यहाँ कोई रोने वाला न होगा.
तू थी मैं था या मैं था तू थी,
अब यहाँ कोई पूछने वाला न होगा.

आओ मिल कर हम अपनी मौत का जश्न  मनाये.
कुछ तुम मुस्कुराओ कुछ हम मुस्कुराये.