वो थप्पड़ मार मार कर,
अपनी औकात दिखा रहे है.
हम चुप है गाँधी के लिए,
नहीं तो भगत सिंह हमको कब से बुला रहे है.
सोये नहीं है हमारे अरमा,
दिल में शोले धधक रहे है.
थप्पड़ मरना हमें भी आता है,
लोकतंत्र की रक्षा के लिए हम
अपमान का ये जहर भी पी रहे है.
हम आये है यह देश बदलने के लिए,
थप्पड़ भी खायेगे,ये गाँधी का देश है गोली भी खायेगे.
तुम थप्पड़ पे थप्पड़ मरो.
हम सिर्फ मुस्कयेगे.
तुम्हारे भविष्य को उज्वल
करने के लिए अपमान के
ये कड़वा घूट भी पि जायेगे.
चंद्रमणि मिश्रा
अपनी औकात दिखा रहे है.
हम चुप है गाँधी के लिए,
नहीं तो भगत सिंह हमको कब से बुला रहे है.
सोये नहीं है हमारे अरमा,
दिल में शोले धधक रहे है.
थप्पड़ मरना हमें भी आता है,
लोकतंत्र की रक्षा के लिए हम
अपमान का ये जहर भी पी रहे है.
हम आये है यह देश बदलने के लिए,
थप्पड़ भी खायेगे,ये गाँधी का देश है गोली भी खायेगे.
तुम थप्पड़ पे थप्पड़ मरो.
हम सिर्फ मुस्कयेगे.
तुम्हारे भविष्य को उज्वल
करने के लिए अपमान के
ये कड़वा घूट भी पि जायेगे.
चंद्रमणि मिश्रा