Tuesday, April 8, 2014

आज रात तनहा हो गई .

आज रात तनहा हो गई .
श्याम रंग में वो रंग गई.
गीत विरह के गा कर,
वो पगली सी हो गई.
आज रात तनहा हो गई.
श्याम रंग में वो रंग गई.
चाँद की चांदनी छोड़ दी.
तारो को भी भूल गई..
श्याम रंग में वो रंगी.
की पगली वो तो आज
सोना ही भूल गई.
आज रात तनहा हो गई.
श्याम रंग में वो रंग गई.
सूरज भी आज नहीं निकला
ऐसी एक बात हो गई.
आज रात ऐसी बीती.
चाँद की चाँद भी खामोश हो गई.
आज रात तनहा हो गई.
श्याम रंग में वो रंग गई.
चंद्रमणि मिश्रा